Tuesday, January 31, 2017

हिन्दू संगठनों ने देश व्यापी आंदोलन करने की चेतावनी..!!!

हिन्दू संगठनों ने देश व्यापी आंदोलन करने की चेतावनी..!!!
कहा - संत श्री आशारामजी बापू की रिहाई के लिए अब हम चुप नही बैठेंगे।


भारत ही नही पूरे विश्व भर में भारतीय संस्कृति का डंका बजाने वाले, गली-गली गांव-गांव में गीता रामायण का ज्ञान पहुँचाने वाले और धर्म परिवर्तन कर चुके लाखों लोगो की हिन्दू धर्म में वापसी करवाने वाले संत श्री आशाराम जी बापू को षड़यंत्र के तहत 3 वर्ष 4 महीने से जोधपुर जेल में बंद किया हुआ है । 
              हिन्दू संगठनों ने देश व्यापी आंदोलन करने की चेतावनी..!!!


आज तक उन पर दोषी होने का एक भी सबूत नही मिल पाया । इस के बावजूद उन को रिहा नही किया जा रहा और तो और कई बार बेल तक खारिज कर दी गयी ।

शर्म की बात तो ये है कि देश में हजारों हिन्दू संगठन और करोड़ों हिन्दू होते हुए भी एक निर्दोष संत को रिहा नही करवा पाए ।


मगर अब इस का बीड़ा उठाने के लिए पंजाब के हिन्दू संगठन मैदान में कूद पड़े हैं । उन्होंने प्रण लिया है कि जब तक बापू जी को रिहा नहीं करवा लेते तब तक हम चैन से नही बैठेंगे । 

इस अभियान को सफल करने के लिए फिलहाल शनिदेव वेलफेयर ट्रस्ट, कट्टर हिन्दू सेना, विश्व् हिन्दू परिषद धर्म प्रसार, हिन्दू सेना, बजरंग दल, युवा सेवा संघ, शिव सेना पंजाब आदि संगठन आगे आए है । 

30 जनवरी 2017 को सभी संगठनों ने मिल कर शनिदेव मंदिर से डी सी दफ्तर लुधियाना तक रैली निकाल कर प्रदर्शन किया है । रैली के बाद मुकेश खुराना, परविंदर भट्टी, अश्वनी शर्मा, सेहजपाल पाली, विमल नय्यर आदि कई लोगों ने डी सी लुधियाना को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्र्पति के नाम ज्ञापन सौंपा ।

 सभी संगठनों ने कहा कि अगर शीघ्र अति शीघ्र बापू जी को रिहा नही किया गया तो हम पहले पंजाब स्तर और फिर देश व्यापी आंदोलन करेंगे । उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमैटम दिया है।


उन्होंने कहा कि देश में कई अपराधियों को न्यायालय बेल दे रहा है । कइयों को रिहा कर दिया है और बापू जी का एक भी दोष साबित नही हुआ फिर भी उन को बेल तक भी नही दी जा रही है । 

ये एक हिन्दू संत के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है । उन्होंने कहा कि अब हम किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेंगे !

स्त्रोत्र : पंजाब लाइव न्यूज : लुधियाना, अनिल अग्निहोत्री।

गौरतलब है कि बिना अपराध सिद्ध हुए बापू आसारामजी साढ़े तीन साल से जोधपुर जेल में बंद हैं । उनको अभी तक जमानत नही मिल पाने पर अनेक हिन्दू संगठनों ने एवं उनके करोड़ों भक्तों ने देश-भर में कई रैलियां निकाली, धरने पर बैठे । यहाँ तक कि दिल्ली जंतर-मंतर पर तो जब से बापू आसारामजी अंदर गये हैं तब से आज तक वहाँ उनके भक्त और हिन्दू संगठनों द्वारा धरना चल रहा है ।

आज हर आम इंसान ये जान चुका है कि संत आसारामजी बापू को षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है फिर भी कानून क्यों उनको न्याय देने को तैयार नहीं..???

क्या ये कोई सोची समझी साजिश तो नहीं..???

क्यों एक के बाद एक दोषी रिहा हो रहे हैं और संत आसारामजी बापू को जमानत तक नहीं...???

आखिर इन हिन्दू संत के साथ हो रहे अन्याय का जिम्मेदार कौन..???

सोचो हिन्दू !!!
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Monday, January 30, 2017

बॉलीवुड में शुरू हुआ इस्लामीकरण!

बॉलीवुड में शुरू हुआ इस्लामीकरण!

क्या अब शाहरुख खान अब्दुल लतीफ के बाद  ‘ओसामा’ और ‘अफजल’ को भी हीरो बना देगा?


हाल ही में प्रदर्शित हुर्इ शाहरुख खान की फिल्म रईस गुजरात के शराब माफिया और आतंकवादी अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित है। फिल्म में शाहरुख ने अब्दुल लतीफ की भूमिका निभायी है।
                      बॉलीवुड में शुरू हुआ इस्लामीकरण!

फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया ने इसे भले ही अस्वीकार किया हो, किंतु शाहरुख द्वारा फिल्म में पहने चश्मे का फ्रेम तक अब्दुल लतीफ की रियल लाइफ से लिया गया है, तो निर्देशक साहब का झूठ भी बेपर्दा हो चुका है।

1980 के दशक में अहमदाबाद में कई बार हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए। इन दंगों के बीच मुसलमानों को नेता मिला जिसका नाम था अब्दुल लतीफ, व्यवसाय से शराब माफिया, जिसे लेकर आज शाहरुख खान ने फिल्म बनार्इ है। 

असामाजिक गतिविधियों के आरोप में जेल में बंद लतीफ ने इसके बाद ही केवल 5 सीटों पर नगरपालिका चुनाव लड़ा आैर मुसलमानों के एक साथ मजबूत वोट बैंक के आधार पर जीत दर्ज की। इसके बाद गुजरात में हुई ढेरों हिन्दुओं की हत्याओं में वांछित और मुंबई बम धमाकों में अभियुक्त लतीफ 1992 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था। किसी घटनाक्रम को अंजाम देने 1995 में वो भारत वापस आ गया। किंतु नवंबर 1995 में गुजरात आतंकवाद निरोधक दल ने लतीफ को पुरानी देहली के एक पीसीओ बूथ से गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद लतीफ करीब दो साल तक साबरमती जेल में रहा। फिर नवंबर 1997 में खबर मिली कि लतीफ ने भागने की कोशिश की और पुलिस मुठभेड में मारा गया। एक शराब माफिया एवं आतंकी अब्दुल लतीफ को पहले भारत के कानून ने चुनाव लड़ने का अधिकार दिया और अब शाहरुख खान जैसे पाकिस्तान परस्त अभिनेता उसे एक नायक की तरह प्रस्तुत कर रहे हैं।

भारत में जहां 20 साल से ज्यादा के परिश्रम से बनी एक संस्कृत फिल्म को साम्प्रदायिक कह कर रोक दिया जाता है, वहीं आतंकी दाउद और अब्दुल लतीफ को नायक के तौर पर दिखाने पर भी किसी को आपत्ति नहीं होती, यह भारत के लिए दुर्देव9 है।

इस सब के बीच भारत के कथित धर्मनिरपेक्षतावादी भी घुटने टेक देते है। तो वो दिन भी दूर नहीं जब ओसामा बिन लादेन को भी एक हीरो के तौर पर बॉलीवुड फिल्म में दिखाए और शाहरुख ही उसमें वो किरदार निभाए!


जब तक गुलशन कुमार थे तब तक हिंदुत्व का खूब बोलबाला था व इस्लामी करण नही हो पा रहा था इसलिए उनकी हत्या करवा दी गई । अब हिन्दू धर्म को अपमानित करने वाली बहुत सारी फिल्में बन रही है और उसके खिलाफ कोई बोलने वाला भी नही है ।
यह भी एक बहुत बड़ा सवाल है कि सेंसर बोर्ड भी ऐसी फिल्मों को पास करता क्यों है..??


आज तक औरंगजेब, तैमूर, गजनी आदि की असलियत पर फिल्म क्यों नही बनाई जाती है ???

जिस पद्मावती ने स्वाभिमान के लिए जौहर किया उसके इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके फिल्म ‘पद्मावती’ निदेशक संजय लीला भंसाली बना रहा था उससे करणी सेना के कार्यकर्ताआें ने मारपीट की तो भंसाली हिंदुओं को आतंकवादी कहने लगा लेकिन बंगाल में कितने हिन्दुओ के घर तोड़ दिए बहु-बहनो की इज्जत लूटी, मार पीट की तब भंसाली को आतंकवाद क्यों नही दिखाई दिया???

संगठन करणी सेना ने कहा है कि, संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म पद्मावती में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच एक बेहद आपत्तिजनक दृश्य डाला है।। इस दृश्य में अलाउद्दीन खिलजी एक सपना देखता है जिसमें वो रानी पद्मावती के साथ है।। करणी सेना का दावा है कि वास्तव में खिलजी और पद्मावती ने कभी एक दूसरे को आमने सामने देखा तक नहीं और इतिहास के किसी पुस्तक में भी इस तरह के किसी सपने का कोई उल्लेख नहीं है।

करणी सेना का दावा है कि, रानी पद्मावती राजपूत थी और उनकी छवि फिल्म में गलत तरीके से दिखाई गई इसलिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया।

भारतीय संस्कृति को तोड़ने का बहुत बड़ा षड्यंत्र चल रहा है ।

 बॉलीवुड में इस्लामी धर्म को बढ़ावा देकर हिन्दू संस्कृति को तोड़ने का कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है।

हिंदुस्तानी सावधान रहें ।

Sunday, January 29, 2017

भारत में पत्रकारिता का इतिहास एवं आज की पत्रकारिता..!!

भारत में पत्रकारिता का इतिहास एवं आज की  पत्रकारिता..!!

1780 को आज के दिन मतलब 29 जनवरी 1780 को भारत में पहला अंग्रेजी अखबार बंगाल गजट छपा था। तब से लेकर अब तक देश में हजारों न्‍यूज पेपर्स, टीवी चैनल्‍स और ऑनलाइन वेबसाइट्स आ चुकी हैं। 

आज प्रतियोगिता की अंधी दौड़ के चक्‍कर में कई बार गलत रिपोर्टिंग के चलते ऐसे हालात भी पैदा हुए हैं जिससे किसी एक को नहीं बल्कि पूरे सिस्‍टम को भी नुकसान उठाना पड़ गया। 

पहले की पत्रकारिता और आज की पत्रकरिता में आये भारी बदलाव !!

विश्व में पत्रकारिता का आरंभ सन् 131 ईस्वी पूर्व रोम में हुआ था । 

उस समय पत्थर या धातु की पट्टी होती थी, जिस पर समाचार अंकित होते थे ।  

15वीं शताब्दी में अखबार छापने की मशीन का अविष्कार किया गया ।

भारत में पहला अखबार 29 जनवरी 1780 में प्रकाशित हुआ । इसका प्रकाशक ईस्ट इंडिया कंपनी का भूतपूर्व अधिकारी विलेम बॉल्ट्स था । यह अखबार कोलकाता से अंग्रेजी में छपता था ।

1819 में बंगाली भारतीय भाषा में पहला समाचार-पत्र प्रकाशित हुआ था। ।

1822 में गुजराती और 1826 में हिंदी में प्रथम समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ ।

अंग्रेजों ने तो देश को तोड़ने के लिए पत्रकारिता शुरू की थी । लेकिन देशभक्तों ने पत्रकारिता इसलिए शुरू की ताकि जनता तक सही खबरें पहुँच सके और समय-समय पर देश की आंतरिक स्थिति से जनता को अवगत कराकर जागरूक किया जा सकें तथा देश में हो रही अन्यायपूर्ण गतिविधियों क खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जा सकें ।

जिससे देश की संस्कृति सुरक्षित रहें और देश में अमन चमन बना रहें ।

परन्तु समय के हेर-फेर में पत्रकारिता में कुछ स्वार्थी और बेईमान लोग घुस गए, जिन्हें देश की अस्मिता से कुछ लेना-देना नही, बस केवल पैसों और अपने नाम के लिए काम करने लगे ।

ऐसे स्वार्थी लोग आज अन्न भारत देश का खाते हैं और काम विदेशी NGO'S के लिए करते हैं ।

इतिहास में वर्णित है कि हमारी भारतीय संस्कृति को मिटाने का प्रयास तो समय-समय पर होता ही आया है ।

भारत के गौरवपूर्ण इतिहास पर दृष्टि डालें तो पता चलता है कि भारत की गरिमा बढ़ाने वाले यहाँ के साधु-संत हैं। जिन्होंने समाज को सही मार्गदर्शन देकर भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर किया है ।

अब अगर भारतीय संस्कृति को नष्ट करना है तो यहाँ के साधु-संतो के प्रति जनता के मन में नफरत पैदा करनी होगी तभी भारतीय संस्कृति को नष्ट किया जा सकता है ।

इसलिए संत और समाज के बीच विदेशी फंड से चलने वाली भारतीय मीडिया ने खाई का काम किया है ।

आज आप देख सकते हैं कि जितना समाजसेवी सुप्रतिष्ठित हस्तियों और साधु-संतो के खिलाफ मीडिया द्वारा बोला जाता है उतना तो बड़े से बड़े देशद्रोही के खिलाफ भी मीडिया नहीं बोलती!
 पर फिर भी कई भोले-भाले लोग अपनी सूक्ष्म मति का उपयोग न करके मीडिया की मनगढ़ंत बातों को सच मान कर अपने ही धर्म के विरुद्ध बोलने लग जाते हैं । 

कई सालों से देश में हजारों विदेशी NGO'S ने अपना काम शुरू कर दिया है।

1984 में ये विदेशी NGO'S भारत में 
टी.वी. लेकर आये । पहले टी.वी. के माध्यम से भारत की जनता को धार्मिक सीरियल दिखाना चालू किया और DDन्यूज शुरू हुआ । जिससे लोगो में टीवी देखने और न्यूज द्वारा देश की गतिविधियाँ जानने की रूचि बढ़े।

फिर जब जनता को टीवी देखने की आदत पड़ गई तब देश की संस्कृति को तोड़ने के इरादे से धीरे-धीरे प्यार भरी फिल्में चालू की गई । उसके बाद अर्धनग्न अवस्था वाली फिल्में, संस्कृति विरोधी सीरियल और साधु संतों, हिन्दू संगठनों तथा देश की संस्कृति विरोधी न्यूज की शुरूवात कर दी गई ।

ऐसा सब दिखा भारतीय संस्कृति को नीचा और विदेशी संस्कृति को ऊँचा दिखाकर लोगों का ब्रेनवाश किया गया । इसी कारण आज के युवावर्ग में अपनी संस्कृति के प्रति नफरत तथा पाश्चत्य सभ्यता के प्रति आकर्षण बढ़ गया है।

आज समाज में खुलेआम गन्दी फिल्में, भारतीय संस्कृति विरोधी न्यूज दिखाई जाती है क्योंकि 90% भारत न्यूज चैनल के मालिक विदेशी है । उनको भारत की जनता का ब्रेनवाश करने के लिए ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम संगठनो द्वारा खूब पैसा मिल रहा है ।

अतः मेरे भारतवासियों सावधान हो जाओ...!!!

अपनी संस्कृति की गरिमा पहचानों...!!!

याद करो वो दिन...जब मुगल और अंग्रजो ने अनेको साल हम पर राज किया था । भारत के मंदिर तोड़े गए, हमारी माँ-बहनों की इज्जत लूटी गई, हमारी देश की सम्पति लूटी गई थी ।

उस समय शिवाजी, महाराणा प्रताप , भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रन्तिकारी आये और देश को आजाद करवाया ।

हे  भारतवासियों ! भारत के लाखों लोगो ने जो देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया है उसको खोने न देना ।

आज जो देश की अस्मिता बनाये रखने में सबसे बड़ी दुश्मन बन कर खड़ी है वो है
विदेशी फंड से चलने वाली भारतीय पत्रकारिता ।

अतः सबसे पहले ऐसी बिकाऊ मीडिया का बहिष्कार कर सिर्फ और सिर्फ देशभक्त चैनल सुदर्शन न्यूज ही देखें जो निष्पक्ष और सच्चाई समाज तक पहुँचाने में आगे आता है ।

जय हिन्द!!
जय भारत!!

Friday, January 20, 2017

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिलने पर कोई आपत्ति नही..!!

🚩राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिलने पर कोई आपत्ति नही..!!

🚩वर्ष 2008 में हुए #मालेगांव बम धमाका मामले में गुरुवार को एक नया मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा कि इस मामले की मुख्य अभियुक्त #साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत देने पर उसे कोई ऐतराज नहीं है ।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिलने पर कोई आपत्ति नही..!!

🚩एनआईए के इस रुख के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बड़ी राहत मिल सकती है । उन्होंने निचली अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की थी, जो खारिज कर दी गयी थी । साध्वी प्रज्ञा ने इसे बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है ।

🚩अदालत में NIA की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि एजेंसी ने पहले ही यह जानकारी दे दी है कि यह मामला मकोका के प्रावधान लागू करने योग्य नहीं है।

🚩साध्वी की अपील पर #न्यायाधीश आरवी मोरे और न्यायाधीश शालिनी फनसालकर जोशी की पीठ सुनवाई कर रही है। #NIA की तरफ से अदालत में सॉलिसिटर जनरल सिंह ने कहा कि मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने आरोपियों के अन्य विस्फोटों में शामिल होने और संगठित अपराध समूह का हिस्सा होने के आधार पर मकोका लागू किया था।


🚩सिंह ने आगे कहा कि NIA की जांच में यह बात सामने नहीं आई कि आरोपी केवल मालेगांव ब्लास्ट में ही आरोपी थे, जिस कारण से उन पर मकोका लागू ही नहीं होता । NIA की ओर से जांच शुरू किए जाने से पहले ही कई गवाह अपने बयान से पलट गए और उनकी ओर से शिकायत की गई कि उन्हें एटीएएस की ओर से झूठा बयान देने के लिए मजबूर किया गया था, ऐसे में इन सब बातों पर विचार करते हुए NIA साध्वी को #जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं करेगी।

🚩दूसरी ओर, मालेगांव बम धमाके की जाँच करने वाले विशेष जांच दल (एटीएस) में शामिल रहे महाराष्ट्र के पूर्व #पुलिस अधिकारी #महबूब मुजावर ने हाल ही में सोलापुर की अदालत में हलफनामा दायर कर दावा किया था कि धमाके के तीन अभियुक्तों को एटीएस अधिकारियों ने साल 2008 में ही मार डाला था ।

🚩महबूब मुजावर का ये भी दावा है कि उनके शव, मुंबई चरमपंथी हमले में मारे गए लोगों के साथ ही जला दिए थे । इन दावों की वजह से महाराष्ट्र एटीएस की अब तक की जाँच सवालों के घेरे में आ गई है ।

🚩साध्वी प्रज्ञा के वकील प्रशांत मग्गू ने बताया कि "हमने अदालत को मुजावर के हलफनामे के बारे में विस्तार से बताया है । हमारा मानना है कि महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में झूठे सबूतों के आधार पर #बेगुनाहों को गिरफ्तार किया है । मुझे आशा है कि साध्वी को जल्द ही जमानत मिल जाएगी ।"

🚩इस मामले की अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी ।

🚩गौरतलब है कि साध्वी प्रज्ञा 9 साल से जेल में है और #कैंसर से पीड़ित हैं, उनके खिलाफ अभीतक एक भी सबूत नही है, यहाँ तक कि उनको फंसाने के कई सबूत मिल चुके हैं। उसके बाद भी अभी तक जमानत नही मिलना ये देश के लिए शर्मनाक बात है ।

🚩आपको बता दें कि जॉइंट इंटेलीजेंस कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस डी प्रधान ने भी  #मालेगांव और #समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। 

🚩प्रधान ने बताया कि ब्लास्ट होने वाला है वो हमें पहले ही पता चल गया था और हमने #गृह मंत्रालय में भी बता दिया था लेकिन #पी. चिंदबर ने राजनैतिक के फायदे के लिए #साध्वी प्रज्ञा, #स्वामी असीमानंद आदि हिन्दू #साधु-संतों को फंसाने के लिए भगवा आतंकवाद नाम देकर उनको जेल भेज दिया था।

🚩जैसा कि हमने पहले भी कई बार बताया है कि #साध्वी प्रज्ञा, #स्वामी असीमानन्द, #कर्नल पुरोहित, #बापू #आसारामजी, #श्री #नारायण साईं, #धनंजय देसाई आदि को फंसाने के पीछे कई सबूत मिल चुके हैं। लेकिन उनको इसलिये जेल में रखा गया है कि वो कट्टर हिंदुत्ववादि हैं।
 🚩उन्होंने लाखों हिंदुओं की #घरवापसी करवाई । 
🚩विदेशी प्रोडक्ट पर रोक लगाई ।
इसलिये उनको विदेशी ताकतों ने मीडिया द्वारा बदनाम करवाया है । जिसका असर न्यायपालिका के फैसलों पर भी पड़ा है ।

🚩अब देखना ये है कि #हिन्दुत्वादी कहलाने वाली #सरकार #कब इन #हिन्दू #संतों को #न्याय दिलवाती है..???

🚩जागो हिन्दू !!

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Thursday, January 19, 2017

20 जनवरी जब-जब यह तारीख आती है, कश्‍मीरी पंडितों के जख्‍म हरे हो जाते हैं

20 जनवरी को कश्‍मीरी पंडितों को काफिर करार दिया गया था..!!

जानिए इतिहास!!
Azaad-Bharat-कश्‍मीरी पंडित
20 जनवरी जब-जब यह तारीख आती है, कश्‍मीरी पंडितों के जख्‍म हरे हो जाते हैं। यही वह तारीख है जिसने जम्‍मू कश्‍मीर में बसे कश्‍मीरी पंडितों को अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर कर दिया। इस तारीख ने उनके लिए जिंदगी के मायने ही बदल दिए थे।

कश्‍मीरी पंडितों को बताया काफिर!!

https://youtu.be/LPcfGSS04hQ
20 जनवरी 1999 को कश्‍मीर की मस्जिदों से कश्‍मीरी पंडितों को काफिर करार दिया गया। मस्जिदों से लाउडस्‍पीकरों के जरिए ऐलान किया गया, 'कश्‍मीरी पंडित या तो मुसलमान धर्म अपना लें, या चले जाएं या फिर मरने के लिए तैयार रहें।' यह ऐलान इसलिए किया गया ताकि कश्‍मीरी पंडितों के घरों को पहचाना जा सके और उन्‍हें या तो इस्‍लाम कुबूल करने के लिए मजबूर किया जाए या फिर उन्‍हें मार दिया जाए।

कश्मीरी पंडितों के सर काटे गए, कटे सर वाले शवों को चौक-चौराहों पर लटकाया गया था ।

बड़ी संख्‍या में कश्‍मीरी पंडितों ने अपने घर छोड़ दिए। आंकड़ों के मुताबिक 1990 के बाद करीब 7 लाख कश्मीरी पंडित अपने घरों को छोड़कर कश्‍मीर से विस्थापित होने को मजबूर हुए।

सरेआम हुए थे बलात्कार!!

एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ आतंकियों ने सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद मार-मार कर उसकी हत्या कर दी। घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। 

मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए जाने लगे। सभी कश्मीरियों को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं।

डर की वजह से वापस लौटने से कतराते!!

आज भी कश्‍मीरी पंडितों के अंदर का डर उन्‍हें वापस लौटने से रोक देता है। कश्‍मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ने से पहले अपने घरों को कौड़‍ियों के दाम पर बेचा था। 27 वर्षों में कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं। आज अगर वह वापस आना भी चाहें तो नहीं आ सकते क्‍योंकि न तो उनका घर है और न ही घाटी में उनकी जमीन बची है। इस मौके पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक कविता शेयर की है। आप भी देखिए अनुपम ने कैसे कश्‍मीरी पंडितों का दर्द बयां किया है।


फरीदाबाद (हरियाणा) के सेक्टर 37 स्थित कश्मीरी भवन में यूथ फॉर पनून कश्मीर तथा कश्मीरी पंडित वेलफेयर असोसिएशन द्वारा कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन हेतु विशेष कार्यक्रम का अायोजन किया गया था उसमे कर्नाटक के श्री प्रमोद मुतालिक, श्रीराम सेना (राष्ट्रिय अध्यक्ष)  ने बताया कि यह कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन का प्रश्न नहीं, तो यह पूरे भारत की समस्या है। हिंदुओं को 1990 में कश्मीर में से क्यों निकाला गया ? क्या वो कोई दंगा कर रहे थे ? या उनके घर में हथियार थे ?
उन्हें केवल इसलिए वहां से निकल दिया गया कि वो ’हिन्दू´ हैं। आज यही समस्या भारत के विविध राज्यों में उभरनी शुरू हो गई है। इसलिए आज एक भारत अभियान की आवश्यकता है।
 पू. (डॉ) चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिती ने बताया कि जिस प्रकार महाभारत के काल में भगवान श्रीकृष्ण ने 5 गांव मांगे थे किंतु कौरवों ने वो भी देने से इन्कार कर दिया था , तदुपरांत महाभारत हुआ। उसी प्रकार आज कश्मीरी हिंदुओं के लिए पूरे भारत के हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रप्रेमी संगठन पनून कश्मीर मांग रहे हैं, परंतु आज सरकार चुप है।

कश्मीर भारत माता का मुकुट है। कश्मीर भूभाग नहीं, कश्यप ऋषि की तपोभूमि है। वहां से हिंदुओं का पलायन हुआ है, परंतु उन्हाेंने हार नहीं मानी है । कश्मीर में पनून कश्मीर और भारत हिन्दू राष्ट्र बनने तक हम कार्य करते रहेंगे यह हमारा धर्मदायित्व है ।

अधिवक्ता श्रीमती चेतना शर्मा, हिन्दू स्वाभिमान, उत्तर प्रदेश – राजनैतिक दलों ने हर जगह जाति का नाम देकर हर मामले को राजनैतिक करने का प्रयास किया है। परंतु आज समय आ गया है कि जो स्थिति जैसी है, वैसा ही सत्य रूप दुनिया के सामने लाया जाए। जब भी, जहां भी जनसांख्यिकी बदली है, वहां कश्मीर बना है। अब उत्तर प्रदेश की भी स्थिति वैसी ही होना शुरु हो गई है। कैराना में जो हुआ, वही आज उत्तर प्रदेश के बाकी क्षेत्रों में भी होने लगा है। अब मात्र 10 वर्ष में या तो भारत हिन्दू राष्ट्र होगा , या हिन्दू विहीन राष्ट्र !


ट्वीटर भी लोगों ने दी प्रतिक्रिया!!

सुरयश ने लिखा कि जम्मू कश्मीर में मुस्लिम 68% है, फिर भी अल्पसंख्यक श्रेणी का खैरात दिया जा रहा है
सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण क्यों?

देवेंद्र कुमार ने लिखा कि #KashmiriPandits को कश्मीर छोड़े 26 साल हो गए। आज भी उनकी कसक ये है कि उनको लेकर राजनीति बहुत हुई, लेकिन उनकी घर वापसी का रास्ता नहीं बना।😢😥 

जीवैश्य लिखता है कि
#KashmiriPandits हम 19 जनवरी कभी नहीं भूलेंगे !भारत माता हम शर्मिन्दा है,कश्मीरी हिंदुओं के दोषी अब तक जिन्दा हैं!

भगवे वादल ने लिखा कि #KashmiriPandits विदेशी रोहिंग्या मुसलमानों के लिए कश्मीर में जगह है,पर कश्मीरी हिंदू विस्थापितों के लिए नही? 


आपको बता दें कि 14 सितंबर, 1989 को बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष टिक्कू लाल टपलू की हत्या से कश्मीर में शुरू हुए आतंक का दौर समय के साथ और वीभत्स होता चला गया।

टिक्कू की हत्या के महीने भर बाद ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट को मौत की सजा सुनाने वाले सेवानिवृत्त सत्र न्यायाधीश नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। फिर 13 फरवरी को श्रीनगर के टेलीविजन केंद्र के निदेशक लासा कौल की निर्मम हत्या के साथ ही आतंक अपने चरम पर पहुंच गया था। उस दौर के अधिकतर हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई। उसके बाद 300 से अधिक हिंदू-महिलाओ और पुरुषों की आतंकियों ने हत्या की।


केंद्र सरकार कब हिंदुओं के नाम से जाने वाले हिंदुस्तान में हिंदुओं को सुरक्षित करेगी ?

Wednesday, January 18, 2017

राष्ट्र के साथ बड़ा धोखा हो रहा है हिन्दू समाज को जागना चाहिए - आचार्य श्री भगवान शर्मा

राष्ट्र के साथ बड़ा धोखा हो रहा है हिन्दू समाज को जागना चाहिए - आचार्य श्री भगवान शर्मा 

बहादुर गढ़ हरियाणा वेदांत आश्रम के सुप्रसिद्ध राम कथाकार आचार्य श्री भगवान शर्मा ने एक निजी चैनल में अपना इंटरव्यू देते हुए हिन्दू संतों को जो टारगेट किया जा रहा है उस पर अपनी व्यथा प्रगट की है ।

आचार्य श्री ने बताया कि हिन्दू धर्म के जो आधार स्तंभ हैं, संत है उन आधार स्तंभों पर करारा प्रहार किया जा रहा है । कई संतो पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं । उनमें बापूजी भी एक हैं, और कई हैं । उनके अच्छे कार्यो को नहीं दर्शाया जाता, उनके द्वारा कितने विद्यालय चलाए जा रहें हैं, कितने बच्चों को गोद लेकर अनाज दिया जा रहा है, भोजन-पानी की व्यवस्था की जा रही है, कपड़े दिए जा रहें है । वो नहीं दिखाते लेकिन सिर्फ अनर्गल चीजों को ही दर्शाया जा रहा है ।

आगे उन्होंने एक कविता के रूप में हिंदुओं को जगाने का आवाहन किया...

ऐ.. देश के हिंदुओं !
ऐ.. देश के हिंदुओं तुम कहाँ सो गए हो ?
क्या अपने इतिहास को भूल गए हो ?
याद करो उस शिवाजी को, जिसने औरंगजेब को पानी पिला दिया था ।

याद करो उस पृथ्वीराज चौहान को, जिसने मोहम्मद गोरी को सोलह बार हरा दिया था ।

विश्व विजेता सिकंदर जब भारत में आया था, चंद्रगुप्त मोर्य ने उसे पैरों तले कुचल डाला था ।

लंका में रावण के अहम का परचम जब लहराया था, हनुमान ने आग लगा कर उसको सबक सिखाया था ।

इतिहास तुम्हें पुकार रहा है कुछ करने को, ललकार रहा है....
भारत की संस्कृति पर हो रहा प्रहार है उनको सबक सिखाओ...

         यह भारत माँ की पुकार है ❗❗
         यह भारत माँ की पुकार है ❗❗
         यह भारत माँ की पुकार है ...❗❗❗

आचार्य जी ने आगे कहा कि हिंदुस्तान जो एक धार्मिक देश है । यहाँ की जनता संतो पर विश्वास रखती है ।

विदेशी कंपनियों ने बापू आसारामजी पर रची साजिश..!!

उन्होंने कहा कि अब एक उदाहरण में आसारामजी बापू का दे रहा हूँ । आसारामजी बापू पर इस तरह के गलत आरोप लगाए जा रहे हैं बिना मतलब क्यों..???


क्योंकि आसारामजी बापू के देश में 7 करोड़ भक्त हैं । अब वो 7 करोड़ मांस नहीं खाते होंगे, सिगरेट नहीं पीते होंगे, शराब नहीं पीते होंगे इसलिए बड़ी बड़ी कंपनी के लोग जो अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियाँ हैं ,एक तो उनका लोस (घाटा) हो रहा है, दूसरा जब ये शराब नहीं पीयेंगे, मांस नहीं खाएंगे तब तक इनका यानि जनता का पतन कैसे होगा...???

हिंदुस्तान में ये शराब चलाने वाले लोग कौन थे ?? 
 चाइना में शराब और कॉफी का व्यापार शुरू किया गया था वो कौन थे?
किसी भी देश को अगर बर्बाद करना हो तो उस देश की जनता का नशे आदि द्वारा नैतिक पतन करवाया जाए और हिंदुस्तान में नैतिक पतन तब तक नहीं हो सकता है जब तक हिंदुस्तान में संत हैं। 

हिन्दू संतों को इस तरह से बदनाम कर दिया जाये जिससे जनता का विश्वास उन पर से उठ जाये । जनता का संतों के प्रति विश्वास तोड़ने के लिए ये गहरी साजिश रची जा रही है ।

संत आसारामजी बापू पर घिनौने आरोप!!

वे आगे बोले कि संत आसारामजी बापू एक राष्ट्रीय संत हैं । उन्होंने हिन्दू समाज के लिए, राष्ट्रीय उत्थान के लिए, एज्युकेशन के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है । उन पर बिलकुल ये घिनौने आरोप लगाए गए हैं  और उन्हें जल्द से जल्द जेल से रिहा किया जाय और हिंदुओं को चाहिए कि उनको बचाने के लिए वो सड़कों पर उतरे, सड़कों पर आंदोलन करें ।

लेकिन मुझे दुःख इस बात का है कि जनता जो है वो इस बात को बहुत कम समझती है।
उसे जागना होगा वो अपने संतो पर विश्वास रखें, भरोसा रखें । 

बापू आसारामजी पर लगे आरोप गलत हैं..!!

आचार्य श्री भगवान शर्मा जी ने आगे बताया कि कृपालुजी महाराज पर आरोप लगाया गया था कि 18 साल की लड़की के साथ बलात्कार किया है । बिलकुल निराधार निकला वो आरोप । 

इसी प्रकार से संत आसारामजी बापू पर भी जो आरोप लगाए गए हैं ये बिलकुल गलत है । 75 साल की उम्र में कोई व्यक्ति इस तरह के घिनौने अपराध नहीं कर सकता और इस तरह के गलत काम कर ही नहीं सकता है ।

मैं संत आसारामजी बापू को बहुत नजदीक से जानता हूँ । उनके लिए जो रैली आयोजित की थी दिल्ली के रामलीला मैदान में मैं वहाँ गया था । और मैंने इस बात को कहा था कि संत आसारामजी बापू को झूठे आरोप में जेल भेजना ये राष्ट्र के साथ बहुत बड़ा धोखा है साजिश है हिन्दू समाज को जागना चाहिए ।



गौरतलब है कि बिना अपराध सिद्ध हुए बापू आसारामजी साढ़े तीन साल से जोधपुर जेल में बंद हैं । उनको अभीतक जमानत नही मिल पाने पर अनेक हिन्दू संगठनों ने एवं उनके करोड़ों भक्तों ने देश-भर में कई रैलियां निकाली, धरने पर बैठे । यहाँ तक कि दिल्ली जंतर-मंतर पर तो जबसे बापू आसारामजी अंदर गये हैं तब से आज तक वहाँ उनके भक्त और हिन्दू संगठनों द्वारा धरना चल रहा है ।

Our Judiciary System Is Biased & Disabled ?

सलमान खान बरी होने से पहले ही सोशल मीडिया पर मचा था बवाल..!!!

सलमान खान के विरोध में जोधपुर कोर्ट में 18 वर्ष से अवैध तरीके से हथियार रखने का केस चल रहा था आज सलमान को 6 मिनट में कोर्ट ने बरी कर दिया।

जिसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

कई ट्वीटर यूजर कानून का मजाक उड़ा रहे थे और कई यूजरों ने तो पहले ही ट्वीट करना प्रारंभ कर दिया था कि देखना ब्रेकिंग न्यूज आने वाली है सलमान बरी होने की..!!

आइये जानते हैं कि सोशल मीडिया पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे थे लोग...

Todays Verdict in favor Salman Khan Proved that court is not for Poors 

जागीरदार साहब कहते हैं कि
आज सलमान खान को कोर्ट द्वारा बरी किया जाना ये साबित करता है कि भारत में कोर्ट आदेश पालन दंड सिर्फ गरीब आम लोगों के लिये ही है ।

हार्दिक भावसार लिखते हैं कि सलमान खान इतनी जल्दी बरी हो गया,
जज साहब ने सुनवाई पर बुलाया था या सेल्फी लेने 
😎 अंधा कानून 😎

ज्योति गंभीर लिखती हैं कि जो कानून 80 वर्षीय निर्दोष संत आसारामजी बापू को जमानत के लिए भी तारीखें देता है वो सलमान खान को 5 मिनट में बरी कर देता है।
क्या सेटिंग है!


ज्योति गंभीर अपनी एक दूसरी ट्वीट में कहती हैं कि सलमान खान जी उन निर्दोषों को भी बताते जाओ कि कैसे बरी हुए जो सालों से न्याय की आस में सजा काट रहे हैं।

विकास कटेवा डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी को टैग करके कहते हैं कि
@Swamy39  सरजी,सलमान खान 18 साल पुराने जुर्म ना जेल ना बेल, 6 मिनट में बरी और निर्दोष हिन्दू बुजुर्ग संत @AsaramBapuJi  बेगुनाह होकर भी जेल में!

कृष्णत्रे कहते हैं कि सलमान खान बरी हो गए। ड्राईवर को भी कोई सजा नहीं मिली। मतलब साफ है कि पेट्रोल में ही दारू मिलाया गया था। गाड़ी नशे में थी🙄😜 😷😷


शालिनी उनको जवाब देते हुए कहती हैं कि
😂😂😂😂साथ में कानून व्यवस्था ने भी पी ली थी थोड़ी झूम बराबर झूम शराबी 😂😂😛😛


नीलेश मकवाना कहते हैं कि वो निर्दोष को बता गया है कि देशद्रोही ताकतों से हाथ मिलाओ खूप पैसा कमाओ न्याय खरीद ले जाओ। #ShameOnJudiciary

विशाल जी कहते हैं कि
सलमान खान बरी हो गया रे। ये तो होना ही था।न्यायालय को कितना पैसा मिला है क्या मालूम ?
निर्दोष संतों को बेल भी नहीं देते । सलमान खान बरी .....


विश्वजीत का कहना है कि यहां सब कुछ बिकता है
बस राजनैतिक पहुँच व दाम सही होना चाहिये
"सलमान एक बार फिर से बरी" गोली बेचारे हिरण ने स्वयं मार ली ?

कुलदीप कादयान का कहना है कि..
अच्छा हुआ सलमान खान बरी हो गया नहीं तो साला,आज पैसे और जुगाड़ से ही भरोसा उठ जाता.. 😂

वासु जी लिखते हैं कि अरे सल्लू भाई को छोड़ दिया,तो कहाँ रहा कुछ अवैध,कहाँ रहा अपराध पता है न कानून है ही अँधा,बन गया है धंधा भाई।

विनीत नैन लिखते हैं कि सबको पता है भाई बरी होके आएगा सलमान खान Jodhpur Court से। पतंग उड़ाने के भी आखिर कुछ फायदे हैं कि नही?😎
#Salman #SalmanVerdict #SalmanKhan

राजीव दुबे लिखते हैं कि
#भक्तो .. शर्त ले लो 
#सलमान खान बरी हो जायेगे 
सलमान #मोदीजी के जिगरी दोस्त जो हैं।

अमित जैन ने लिखा था कि ब्रेकिंग न्यूज आने वाली है......
सलमान खान आर्म्स एक्ट केस में बरी,अवैध हथियार,सलमान के नही,मरने वाले हिरन के पास था.....!
(जोधपुर कोर्ट)

इस तरीके से कई ट्वीटर यूजर कानून की खिल्ली उड़ा रहे थे और सलमान के  खिलाफ टिप्पणियाँ कर रहे थे।

गौरतलब है कि हमारे देश के हिन्दू संत जिसमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर 9 साल से, स्वामी असीमानन्द 7 साल से और संत आसारामजी बापू साढ़े 3 साल से क्लीन चिट मिलने पर और अभी तक एक भी आरोप सिद्ध न होने पर भी एक सामान्य जमानत के मौलिक अधिकार से भी न्यायालय द्वारा वंचित हैं । और न जाने कितने मासूम जेल में ही दम तोड़ देते हैं न्याय की आशा-आशा में ।

क्या सच में...

Our Judiciary System Is Biased & Disabled..?

Sunday, January 15, 2017

कर्नल पुरोहित ने एटीएस पर लगाया फर्जी सबूतों का आरोप..!!

मेरे विरुद्ध कोई सबूत नहीं : साध्वी प्रज्ञासिंह 
सब फर्जी सबूत है :कर्नल पुरोहित 

मुंबई – 2008 के मालेगांव बम विस्फोट प्रकरण में कथित आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुंबर्इ उच्च न्यायालय को गुरुवार को बताया कि इस प्रकरण में उनके शामिल या लिप्त होने के सरकार के पास कोई प्रमाण नहीं हैं और पहले ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मुझे क्लीन चिट दे दी है। इस आधार पर उन्होंने न्यायालय से जमानत पर मुक्त करने की मांग की।
कर्नल पुरोहित ने एटीएस पर लगाया फर्जी सबूतों का आरोप..!!

यह मांग साध्वीजी के वकील आकाश गुप्ता ने न्यायाधीश रंजीत मोरे और न्यायालय प्रमुख जज शालिणी फणसलकर-जोशी के समक्ष रखी। इस पर न्यायालय ने 19 जनवरी को सुनवाई रखी है। साध्वी के वकील ने न्यायालय को बताया कि उनकी मुवक्किल एक महिला है और वह पिछले 8 साल से जेल में है। इसके अलावा, वे कैंसर से पीड़ित हैं और इसी आधार पर वे जमानत की मांग कर रही हैं। अपनी याचिका में साध्वीजी ने यह भी दावा किया है कि विशेष एनआईए न्यायालय ने पिछले साल 28 जून को उनकी जमानत याचिका रद्द कर दी थी, किंतु ‘पिछले दिनों जो नए तथ्य सामने’ आए हैं उस पर न्यायालय ने अभी तक विचार नहीं किया है।

नवंबर,2015 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद साध्वीजी ने विशेष एनआईए न्यायालय में अपनी जमानत याचिका रखी थी और इसे न्यायालय ने नामंजूर करते हुए कहा था कि प्रारंभिक दृष्टि से ऐसा लगता है कि उनके विरुद्ध लगे आरोपों में दम है। लेकिन मई, 2016 में एनआईए ने जो चार्ज शीट दायर की थी उसमें सभी दोषों से साध्वीजी को मुक्त कर दिया गया था। एनआईए ने उनके विरुद्ध लगे ‘मकोका’ के सभी आरोपों को वापस ले लिया था।

कर्नल पुरोहित ने एटीएस पर लगाया फर्जी सबूतों का आरोप..!!

मुंबई – वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बन्दी बनाए गए पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने बुधवार को मुंबर्इ उच्च न्यायालय में आरोप लगाया कि महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दल (एटीएस) ने उनके खिलाफ फर्जी सबूत जुटाए और यहां तक कि राष्ट्रीय जांच दल (एनआईए) भी एटीएस की जांच से असहमत है।

न्यायमूर्ति आरवी मोरे और न्यायमूर्ति शालिनी फणसालकर जोशी की खंडपीठ उनकी जमानत याचिका खारिज करने के न्यायालय के आदेश के खिलाफ पुरोहित की अपील पर सुनवाई कर रही थी। कर्नल पुरोहित को मालेगांव विस्फोट प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था । याचिका में आरोप लगाया गया कि, पुरोहित को एटीएस ने गैर-कानूनी रूप से निलंबित किया और उन पर अत्याचार किए।

3 नवंबर, 2008 को एटीएस अधिकारियों ने एक कमरे में आरडीएक्स रख दिए और दावा किया कि इस कमरे के बारे में पुरोहित ने उस समय बताया जब उनसे पूछताछ हो रही थी। यह भी आरोप लगाया गया कि, अनेक गवाहों को एटीएस ने झूठे वक्तव्य देने के लिए बाध्य किया जिन्हें बाद में एनआईए ने बेनकाब किया। यह भी कहा गया कि, एटीएस निर्दोष लोगों को झूठे मामले में फंसाने के लिए कुख्यात है। इसी मामले में सीबीआई ने कुछ एटीएस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की थी क्योंकि इन अधिकारियों ने कुछ गवाहों को गायब ही कर दिया था।

जांच पहले एटीएस ने संभाली थी लेकिन बाद में इसे एनआईए को सौंप दिया गया। एनआईए ने इस मामले से मकोका के कठोर प्रावधान हटा दिए थे और मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित कुछ आरोपियों को क्लीन चिट दी थी। पुरोहित के वकील श्रीकांत शिवडे ने आरोप लगाया कि एटीएस ने उनके मुवक्किल के खिलाफ झूठे और फर्जी सबूत जुटाए और एनआईए के आरोपपत्र के सबूतों से यह साफ है। (नवभारत टाइम्स)

इस देश में जमानत तो एक आतंकवादी को भी मिल जाती है लेकिन हिन्दू संतों एवं हिन्दू कार्यकर्ताओं को सामान्य जमानत तक भी नही मिलती है ।
ये कौन सा कानून है?

ऐसा तो नही है देश में सर्वोपरि माना जाने  वाला कानून भी देशविरोधी ताकतों के इशारे पर काम कर रहा हो..?

इसलिये ऐसा लग रहा है कि बम बनाकर विस्फोट करने वाले टुंडा जैसे आतंकी को भी रिहा किया जाता है लेकिन कैंसर से पीड़ित, बिना सबूत, क्लीन चिट मिलने पर भी 8 साल से जेल में बन्द साध्वी प्रज्ञा को जमानत नही मिल पा रही है इसलिए संशय होता है कि क्या कानून केवल हिन्दुओं को ही प्रताड़ित करने के लिए बनाया है???

कर्नल पुरोहित पर भी मालेगांव विस्फ़ोट में NIA द्वारा मकोका हटा दी गई है ।

एनआइए के प्रमुख शरद कुमार ने कहा है कि समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है ।

आपको बता दें कि जॉइंट इंटेलीजेंस कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस डी प्रधान ने देश में भगवा आतंक की थ्योरी को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। 

जिसमे उन्होंने बताया है कि मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट का हमें पहले से ही पता था और हमने गृहमंत्रालय को भी बताया था और साध्वी प्रज्ञा एवं स्वामी असीमानंद आदि हिंदुत्वनिष्ठों का ब्लास्ट में नाम ही नही था और ब्लास्ट पाकिस्तान द्वारा ही करवाया गया था । इसका पुख्ता सबूत होने पर भी पूर्व गृहमंत्री चिंदमर ने राजनीतिक फायदे के लिए साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानन्द जैसे हिंदुत्व निष्ठों को जेल भेजा था।

अब बड़ा सवाल यह है कि टुंडा जैसे आतंकी के खिलाफ इतने अहम सबूत होने पर भी वह आसानी से बरी हो जाता है लेकिन इन हिन्दू संतों के खिलाफ सबूत नही होने पर भी जेल में रहते है 
तो क्या हिंदुत्व-निष्ठ होना गुनाह है..???

ऐसे ही संत आसारामजी बापू को भी क्लीन चिट मिल चुकी है लेकिन उनको भी अभीतक जमानत तक नही मिल पा रही है ऐसे ही श्री धनंजय देसाई को भी बिना सबूत जेल में रखा हुआ है ।

हिन्दूवादी सरकार आने पर भी इन हिंदुत्व निष्ठों को जमानत तक नही मिलना और खूंखार आतंकी टुंडा जैसे का बरी हो जाना।
कितना बड़ा आश्चर्य है..!!!

क्या इन संतों ने ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगाई थी इसलिए उनको टारगेट बनाकर जेल भेज दिया गया है?

निर्दोष हिन्दू संतों को कब मिलेगा न्याय???

"क्या देर से न्याय मिलना अन्याय का ही रूप नहीं ?"

सोचो हिन्दू !!!

Friday, January 13, 2017

शुभ कार्यो की शुरुवात भी 14 जनवरी से ही हो जाएगी।

🚩14 जनवरी 2017 
मकर संक्रान्ति पर बना दुर्लभ योग..!!
क्या करें..?
क्या महत्व है..?

🚩आइये जाने...

🚩पंचाग की गणना के अनुसार इस बार विशिष्ट संयोगों में बृहस्पति का #सूर्य से पंचम दृष्टि संबंध तथा सूर्य का बृहस्पति से नवम दृष्टि संबंध बन रहा है। बारह वर्ष में आने वाले इस प्रकार के दृष्टि संबंध का विशेष #लाभ लोगों को प्राप्त होता है। 
मकर संक्रान्ति पर बना दुर्लभ योग..!! क्या करें..?  क्या महत्व है..?
🚩इस योग में सूर्य के साथ #भगवान नारायण का भी ध्यान कर आराधना करनी चाहिए। इस दिन #आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य स्त्रोत, सूर्याष्टक आदि का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता है। इनके #पाठ से वंशवृद्धि पराक्रम में वृद्धि तथा #परिवार का उत्कर्ष होता है।
🚩महाकाल पर्व रहेगा शुभप्रद..!!

🚩इस बार माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर #शनिवार के दिन 14 जनवरी को प्रात: 7 बजकर 38 मिनट पर अश्लेषा नक्षत्र प्रीति योग एवं कर्क राशि के चंद्रमा के साक्षी में मकर लग्न में भगवान सूर्य नारायण का #मकर राशि में प्रवेश होगा, चूंकि उदयकाल की साक्षी में होने वाले इस प्रवेशकाल का #धर्म शास्त्रीय महत्त्व है। इस दृष्टि से #मकर #संक्रान्ति का #महापर्वकाल विशेष महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व #पुण्यकाल की दृष्टि से दिनभर रहेगा।


🚩ज्योत‌िष के अनुसार शन‌ि देव को मकर और कुंभ राश‌ि का स्वामी कहा गया है। ऐसे में शनि देव के प्रिय वार शन‌िवार को उनकी राश‌ि में पिता सूर्य का आना शन‌ि महाराज को मेहरबान और कृपालु बनाने के ल‌िए उत्तम रहेगा।  #लंबे अर्से के बाद ये शुभ संयोग बना है। शन‌िवार को मकर संक्रांत‌ि का पड़ना एक दुर्लभ संयोग माना जाता है।

🚩संक्रान्ति का नक्षत्र राक्षसी नाम से है। जो कमजोर वर्ग पशु पालक आदि के लिए #शुभ प्रद रहेगी। यही नहीं रक्त वस्त्र, धनुष आयुध, लौहपात्र, पय भक्षण, गौरोचन, मृगवर्णी, कंचूकी, प्रथम यान, व्यापिनी उत्तर की ओर गमन करनेवाली ईशानदृष्ट के साथ पन्द्रह मुहूर्त में बैठेगी। देखा जाए तो जियोलॉजिकल, बॉयोलॉजिकल एवं अर्थ मेट्रिक सिद्धांत शास्त्र के अनुसार रेडियो कार्बन विधि में सूर्य जब-जब मकर राशि में प्रवेश होता है, तो वह अगले मकर वर्ष के लिए प्राकृतिक नियम से जोड़कर संतुलन की स्थिति में लाता है।

🚩12 राशि धारकों के लिए दस गुना फलदायक होगा। #मकर संक्रान्ति यानी 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगें। पिता-पुत्र के मिलन का लाभ लगभग दो महीने  तक रहेगा ।

🚩सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मलमास समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही #शुभ कार्यो की शुरुवात भी 14 जनवरी से ही हो जाएगी। इसबार मकर संक्रान्ति 14 जनवरी को मनाई जाएगी।

🚩मकर प्रवेश के साथ ही #सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग व चंद्रमा कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र के अलावा प्रीति तथा मानस योग भी रहेगा।

🚩इन नक्षत्रों का योग बेहद शुभ दुर्लभ और श्रेष्ठ है। #इस योग से संक्रान्ति पर 12 राशियों के धारकों को दस गुना फलदायी हो सकता है।

🚩क्या करे मकर संक्रांति को..???

🚩14 जनवरी - मकर संक्रांति ( पुण्यकालः सूर्योदय से सूर्यास्त)

🚩मकर संक्रांति या #उत्तरायण दान-पुण्य का पर्व है । इस दिन किया गया #दान-पुण्य, जप-तप अनंतगुना फल देता है । इस दिन गरीब को अन्नदान, जैसे तिल व गुड़ का दान देना चाहिए। इसमें तिल या तिल के लड्डू या तिल से बने खाद्य पदार्थों को दान देना चाहिए । कई लोग रुपया-पैसा भी दान करते हैं।

🚩मकर संक्रांति के दिन साल का पहला #पुष्य नक्षत्र है मतलब खरीदारी के लिए बेहद शुभ दिन।

🚩उत्तरायण के दिन भगवान सूर्यनारायण के 
इन नामों का जप विशेष हितकारी है ।

ॐ मित्राय नमः । ॐ रवये नमः । 
ॐ सूर्याय नमः । ॐ भानवे नमः ।
ॐ खगाय नमः । ॐ पूष्णे नमः ।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः । ॐ मरीचये नमः । 
ॐ आदित्याय नमः । ॐ सवित्रे नमः ।
ॐ अर्काय नमः ।  ॐ भास्कराय  नमः । 
ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः ।

🚩यदि नदी तट पर जाना संभव नही है, तो अपने घर के स्नान घर में #पूर्वाभिमुख होकर जल पात्र में तिल मिश्रित जल से स्नान करें। साथ ही समस्त पवित्र नदियों व तीर्थ का स्मरण करते हुए ब्रम्हा, विष्णु, रूद्र और भगवान भास्कर का ध्यान करें। साथ ही इस जन्म के पूर्व जन्म के ज्ञात अज्ञात मन, वचन, शब्द, काया आदि से उत्पन्न दोषों की निवृत्ति हेतु #क्षमा याचना करते हुए सत्य धर्म के लिए निष्ठावान होकर सकारात्मक कर्म करने का संकल्प लें।


🚩तिल का महत्व..!!

🚩विष्णु धर्मसूत्र में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन #तिल का 6 प्रकार से उपयोग करने पर जातक के जीवन में सुख व समृद्धि आती है।

 🚩तिल के तेल से स्नान करना। #तिल का उबटन लगाना। पितरों को तिलयुक्त तेल अर्पण करना। तिल की आहूति देना। तिल का दान करना। तिल का सेंवन करना।



🚩मकर संक्रांति का महत्व क्यों..???

🚩हिन्दू संस्कृति अति प्राचीन #संस्कृति है, उसमें अपने जीवन पर प्रभाव पड़ने वाले ग्रह, नक्षत्र के अनुसार ही वार, तिथि त्यौहार बनाये गये हैं ।

🚩इसमें से एक है  मकर संक्रांति..!!

🚩हिंदू धर्म ने माह को दो भागों में बाँटा है- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इसी तरह वर्ष को भी दो भागों में बाँट रखा है। #पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन। उक्त दो अयन को मिलाकर एक वर्ष होता है।   

🚩मकर संक्रांति के दिन #सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करने की दिशा बदलते हुए थोड़ा उत्तर की ओर ढलता जाता है, इसलिए इस काल को उत्तरायण कहते हैं।  

🚩सूर्य पर आधारित #हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व माना गया है। वेद और पुराणों में भी इस दिन का विशेष उल्लेख मिलता है। होली, दीपावली, दुर्गोत्सव, शिवरात्रि और अन्य कई त्यौहार जहाँ विशेष कथा पर आधारित हैं, वहीं #मकर संक्रांति खगोलीय घटना है, जिससे जड़ और चेतन की दशा और दिशा तय होती है। मकर संक्रांति का महत्व #हिंदू धर्मावलंबियों के लिए वैसा ही है जैसे वृक्षों में पीपल, हाथियों में ऐरावत और पहाड़ों में हिमालय।  

🚩सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश को उत्तरायण माना जाता है। इस राशि परिवर्तन के समय को ही मकर संक्रांति कहते हैं। यही एकमात्र पर्व है जिसे समूचे #भारत में मनाया जाता है, चाहे इसका नाम प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग हो और इसे मनाने के तरीके भी भिन्न हो, किंतु यह बहुत ही महत्व का पर्व है।  

🚩इसी दिन से हमारी धरती एक नए वर्ष में और सूर्य एक नई गति में प्रवेश करता है। वैसे वैज्ञानिक कहते हैं कि 21 मार्च को धरती सूर्य का एक चक्कर पूर्ण कर लेती है तो इसे माने तो #नववर्ष तभी मनाया जाना चाहिए। #इसी 21 मार्च के आसपास ही विक्रम संवत का नववर्ष शुरू होता है और #गुड़ी पड़वा मनाया जाता है, किंतु 14 जनवरी ऐसा दिन है, जबकि धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है। जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों को ठीक नही माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं।  

🚩मकर संक्रांति के दिन ही पवित्र #गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था। महाभारत में #पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था, कारण कि #उत्तरायण में देह छोड़ने वाली आत्माएँ या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती हैं या पुनर्जन्म के चक्र से उन्हें छुटकारा मिल जाता है।

 🚩दक्षिणायन में देह छोड़ने पर बहुत काल तक आत्मा को अंधकार का सामना करना पड़ सकता है। सब कुछ प्रकृति के नियम के तहत है, इसलिए सभी कुछ प्रकृति से बद्ध है। #पौधा प्रकाश में अच्छे से खिलता है, अंधकार में सिकुड़ भी सकता है। इसीलिए मृत्यु हो तो प्रकाश में हो ताकि साफ-साफ दिखाई दे कि हमारी गति और स्थिति क्या है। क्या हम इसमें सुधार कर सकते हैं? 
क्या ये हमारे लिए उपयुक्त चयन का मौका है?  



🚩स्वयं भगवान #श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्व बताते हुए #गीता में कहा है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग #ब्रह्म को प्राप्त हैं। इसके विपरीत सूर्य के दक्षिणायण होने पर पृथ्वी अंधकारमय होती है और इस अंधकार में शरीर त्याग करने पर पुनः जन्म लेना पड़ता है। (श्लोक-24-25)